Thursday, November 15, 2012

कहाँ है तू



तू कहीं भी हो

कुछ फरक नहीं पड़ता 

क्योंकि हर रात के बाद

है नया दिन चता 

तू दूर है कहीं

जहाँ मैं तुझे देख नहीं पाता 

पर तू मेरे दिल में ही है

मैं ये क्यों समझ नहीं पाता

मैं तेरी और मेरी मुलाकातों को याद करता हूँ 

पर वो कहते हैं मैं वक़्त बर्बाद करता हूँ

उन्हें  क्या पता

इन यादों में ही तेरा दीदार हो जाता है

न चाहते हुए भी फिर से प्यार हो जाता है।

No comments:

Post a Comment